पर्यावरण संरक्षण पर Jhotwara MLA का बड़ा संदेश: अब हर घर से शुरू होगी हरियाली और जल की रक्षा

जयपुर के झोटवाड़ा क्षेत्र में रहने वाले किसी भी परिवार से पूछिए, गर्मियों के महीनों में पानी की हर एक बूंद की कीमत और तपते कंक्रीट के मकानों की तपन उनके दैनिक जीवन को कितना प्रभावित करती है। एक आम गृहणी जब सुबह पानी के सीमित दबाव को देखती है या एक चिंतित पिता जब अपने बच्चों को झुलसाने वाली गर्मी में स्कूल भेजता है, तो पर्यावरण संकट कोई किताबी बात नहीं रह जाता। राजस्थान की इस रेतीली मरुधरा पर सालों से हम केवल मानसून का इंतजार करते आए हैं, लेकिन अपने आस-पास के घटते पेड़ों और सूखते जलस्तर को रोकने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर कोई बड़ी पहल नहीं हो पा रही थी। शहर के कंक्रीट के बढ़ते जाल के बीच अब यह जरूरी हो गया है कि हम केवल प्रशासनिक मदद का इंतजार न करें, बल्कि अपने हिस्से की प्रकृति को खुद संवारें।



स्थानीय Jhotwara MLA और कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने विश्व पर्यावरण दिवस पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की शुरुआत करते हुए नागरिकों से अपनी छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने और सक्रिय पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया है।

झोटवाड़ा में पर्यावरण संरक्षण और जल संचय को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

कौशल विकास एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा स्थानीय निकायों के सहयोग से 'एक पेड़ मां के नाम' जन-अभियान के तहत हर नागरिक को एक फलदार वृक्ष लगाने और उसकी देखरेख करने की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। इसके साथ ही शहरी और ग्रामीण इलाकों में भूजल स्तर को वापस सुधारने के लिए घरेलू छतों पर वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) प्रणालियों को अनिवार्य रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

  • एक पेड़ मां के नाम अभियान: झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड और ग्राम पंचायत में नागरिकों को छायादार और फलदार पौधे वितरित किए जा रहे हैं ताकि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा के साथ पोषण भी मिल सके।

  • अनिवार्य रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग: पानी की कमी से जूझ रहे जयपुर के क्षेत्रों में भूजल रिचार्जिंग को बढ़ाने के लिए घरों की छतों पर पारंपरिक वर्षा जल संचयन मॉडल को अपनाने की मुहिम तेज की गई है।

  • पक्षियों के लिए परिंडा अभियान: भीषण गर्मी के दौरान मूक पक्षियों के जीवन की रक्षा के लिए सार्वजनिक स्थानों, पार्कों और सरकारी इमारतों पर बड़े पैमाने पर परिंडे बांधने का काम जनभागीदारी से किया जा रहा है।

  • प्राकृतिक पर्यावरण चेतना: भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों को पुनर्जीवित करते हुए वृक्षों, नदियों और पर्वतों के संरक्षण को लेकर स्थानीय युवाओं और स्कूली बच्चों के बीच विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।



जनभागीदारी से ही बदलेगा मरुधरा का अर्बन क्लाइमेट

"पृथ्वी हमारी करोड़ों जरूरतों को पूरा करती है और हमें जीवन जीने के लिए अमूल्य संसाधन देती है, इसलिए यह हमारा परम कर्तव्य है कि हम भी 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जुड़कर इस प्रकृति को कुछ वापस लौटाएं," यह आह्वान कर्नल राठौड़ ने झोटवाड़ा में आयोजित एक जमीनी कार्यक्रम के दौरान किया। यह दूरदर्शी सोच उनके क्षेत्र में चल रहे व्यापक Jhotwara MLA work का एक अहम हिस्सा है, जहां विकास कार्यों के साथ-साथ प्राकृतिक संतुलन को भी बराबर प्राथमिकता दी जा रही है। अपने नियमित सुबह के दौरों और जनसंवाद मॉडल चौपालों के दौरान, वे सीधे क्षेत्र के लोगों से मिलकर छतों पर जल संचयन प्रणालियों की स्थिति की समीक्षा करते हैं। उनका मानना है कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी बजट या फाइलों से नहीं, बल्कि हर नागरिक के अपने घर से शुरू होने वाले एक छोटे संकल्प से ही संभव हो पाएगी।

2004 ओलंपिक पदक विजेता के रूप में वैश्विक पटल पर भारत के अनुशासन का लोहा मनवाने वाले और एक रिटायर्ड INDIAN ARMY COLONEL के रूप में अपनी कड़क कार्यशैली के लिए प्रसिद्ध, कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ हर अभियान को एक मिशन की तरह कमांड करते हैं। वे जानते हैं कि पर्यावरण की रक्षा केवल भाषणों से नहीं बल्कि सीधे धरातल पर उतरकर पौधे लगाने और पक्षियों के लिए परिंडे बांधने जैसे व्यावहारिक कार्यों से होती है। राजस्थान सरकार के एक प्रमुख government minister rajasthan के तौर पर उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि झोटवाड़ा के हर वार्ड में हरित पट्टियों का विकास किया जाए। कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के बीच हरियाली की यह नई क्रांति यह साफ दर्शाती है कि जब एक अनुशासित विजनरी नेतृत्व जनता को जिम्मेदारी का अहसास कराता है, तो पूरा समाज मिलकर अपनी धरती को सुरक्षित बनाने के लिए उठ खड़ा होता है।

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