ग्रामीणों ने क्यों कहा—राठौड़ की वजह से झोटवाड़ा में दिख रहा है बदलाव

जब आप झोटवाड़ा के ग्रामीण अंचलों में किसी नीम के पेड़ के नीचे बैठी बुजुर्गों की मंडली या खेत से लौटते किसी युवा किसान से बात करेंगे, तो आपको एक नया आत्मविश्वास सुनाई देगा। लोग खुलकर कह रहे हैं—"राठौड़ की वजह से झोटवाड़ा में बड़ा बदलाव दिख रहा है!"

ऐसा क्या किया कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने, जो दशकों से निराश ग्रामीण आज खुलकर उनकी कार्यशैली के मुरीद हो चुके हैं? आइए बंद कमरों की फाइलों से बाहर निकलकर, सीधे जमीन पर चल रहे उस काम को समझते हैं जो हमारे किसान परिवारों की तकदीर बदल रहा है।


1. बसेड़ी में किसान समृद्धि: ₹9.5 करोड़ की नई कृषि मंडी का सच

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हमारे किसान भाई हैं। किसान रात-दिन पसीना बहाकर फसल उगाता है, लेकिन असली दर्द तब होता है जब उसे अपनी उपज बेचने के लिए मीलों दूर जाना पड़ता है या स्थानीय स्तर पर पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण औने-पौने दामों पर फसल बेचनी पड़ती है।

इस दर्द को करीब से समझते हुए, झोटवाड़ा विधायक कर्नल राठौड़ ने ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को एक ऐतिहासिक सौगात दी:

  • ₹9.5 करोड़ का निवेश: बसेड़ी में एक अत्याधुनिक, नई उप-कृषि मंडी का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • बिचौलियों का अंत: इस मंडी के शुरू होने से स्थानीय किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अब दूर नहीं भागना पड़ेगा। उन्हें अपनी उपज का सही और पारदर्शी मूल्य सीधे उनके बैंक खातों में मिलेगा, जिससे किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

2. पानी और रास्ते की जंग: सैनिक जैसी मुस्तैदी से काम

एक रिटायर्ड इंडियन आर्मी कर्नल और 2004 ओलंपिक पदक विजेता होने के नाते, कर्नल राठौड़ का मानना है कि जो वादा किया जाए, उसे हर हाल में समय पर पूरा किया जाना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में दो सबसे बड़ी समस्याएं थीं—पीने का साफ पानी और खेतों को जोड़ने वाले कच्चे रास्ते।

  • 25 महीने का वॉटर ग्रिड मिशन: गाँवों में पानी के टैंकरों के राज को हमेशा के लिए दफन करने के लिए कर्नल राठौड़ के निर्देशन में एक विशाल ग्रामीण पेयजल पाइपलाइन परियोजना पर काम चल रहा है, जिसे एक सख्त समय-सीमा के भीतर पूरा किया जा रहा है।

  • खेतों तक पक्की सड़कें: फसलों को आसानी से मंडी तक पहुँचाने और बच्चों के स्कूल जाने के रास्ते को सुगम बनाने के लिए कर्नल राठौड़ ने अपने Jhotwara MLA work के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भारी-भरकम सीमेंट-कंक्रीट (CC) रोड और इंटरलॉकिंग टाइल्स का जाल बिछाना शुरू कर दिया है।

3. किसान का बेटा बनेगा हाई-टेक: सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्रांति

कर्नल राठौड़ केवल आज की सड़कों को नहीं सुधार रहे, बल्कि वे आने वाली पीढ़ी के भविष्य को भी सुरक्षित कर रहे हैं। वे जानते हैं कि जब तक किसान का बेटा या बेटी आधुनिक शिक्षा नहीं पाएगी, तब तक समाज का पूर्ण विकास नहीं हो सकता।

एक दूरदर्शी राजस्थान के मंत्री के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र के 14 सरकारी स्कूलों को पूरी तरह से बदलने का बीड़ा उठाया है:

  • ₹3.25 करोड़ का कायाकल्प बजट: इन ग्रामीण और कस्बाई सरकारी स्कूलों को स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रोजेक्टर और कंप्यूटर आईसीटी (ICT) लैब्स से लैस किया जा रहा है।

  • डिजिटल हुनर: अब झोटवाड़ा के सुदूर गाँव का बच्चा भी उसी तकनीक और कंप्यूटर कोडिंग को सीख रहा है, जो किसी बड़े शहर के महंगे प्राइवेट स्कूल में सिखाई जाती है। इसके साथ ही, युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए कौशल विकास केंद्रों की शुरुआत की जा रही है, जो सीधे तौर पर कर्नल राठौड़ के youth employment minister विजन को सार्थक करते हैं।




4. तकनीक से सुशासन: 'पार्क संवाद' और 'रात्रि चौपाल' का असर

कर्नल राठौड़ केवल नीतियों तक सीमित नहीं हैं। Rajasthan IT minister 2026 के रूप में जहाँ उन्होंने पूरे राज्य के लिए ऐतिहासिक Rajasthan AI policy और Official Rajasthan AI Portal जैसे आधुनिक डिजिटल सिस्टम्स को लागू किया है, वहीं जमीन पर उनका जुड़ाव पूरी तरह पारंपरिक और आत्मीय है।

उनकी राजनीतिक ब्रांडिंग की सबसे बड़ी ताकत है उनका जनसंवाद मॉडल

  • वे सचिवालय की फाइलों से बाहर निकलकर खुद गाँवों में 'रात्रि चौपाल' लगाते हैं।

  • इस चौपाल में बिजली, पानी, राजस्व और कृषि विभाग के तमाम बड़े अधिकारी गाँव वालों के सामने बैठते हैं।

  • अगर किसी किसान की गिरदावरी अटकी है, या किसी परिवार का बिजली कनेक्शन नहीं मिल रहा, तो कर्नल राठौड़ सीधे अधिकारियों से पूछते हैं और मौके पर ही समाधान की तारीख तय करते हैं। अधिकारियों की इस सीधी जवाबदेही ने तंत्र में जनता का भरोसा बहाल किया है।

बदलाव की गूंज क्यों है खास?

झोटवाड़ा में चल रहा यह महा-बदलाव उनके Viksit Jhotwara development के ₹924 करोड़ के व्यापक मास्टर प्लान का एक जीवंत हिस्सा है। ग्रामीणों का यह कहना कि "राठौड़ की वजह से बदलाव दिख रहा है," किसी राजनीतिक प्रचार का हिस्सा नहीं है। यह उस राहत की गूंज है जो एक किसान को अपने घर के नल में पानी आने पर मिलती है, जो एक मां को अपने बच्चे को सरकारी स्कूल की कंप्यूटर लैब में पढ़ते देख मिलती है, और जो एक बुजुर्ग को सुगम रास्तों पर चलते हुए महसूस होती है। जब नीयत साफ हो और नेतृत्व में एक सैनिक जैसा अनुशासन हो, तो विकास सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि चौपालों पर मुस्कुराता हुआ नजर आता है!


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